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रविवार, 6 दिसंबर 2009

असली नकली का भेद

सोलोमन के ज्ञान के चर्चे चारों ओर थे। एक बार ईथोपिया की रानी उसकी परीक्षा लेने गई क्योंकि उसने सुन रखा था कि सोलोमन पृथ्वी पर उस समय सर्वाधिक ज्ञानी व्यक्ति हैं। रानी ने एक हाथ में नकली फूल लिए, जो बड़े कलाकारों से बनवाए गए थे और दूसरे हाथ में असली फूल लिए। नकली फूल इतने सुंदर बने थे कि असली को मात कर दें। वह दोनों फूल लेकर सोलोमन के दरबार में पहुंची।

सोलोमन से थोड़ी दूर खड़े होकर उसने कहा कि ‘सोलोमन, मैंने सुना है कि आप पृथ्वी पर सबसे बड़े ज्ञानी व्यक्ति हैं। ज़रा मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिए। मेरे किस हाथ में असली फूल है और किस हाथ में नकली?’

सोलोमन भी हैरान हुआ। दोनों फूलों को देखकर असली-नकली की पहचान कर पाना मुश्किल था। सोलोमन काफी भ्रमित था। उसने जल्दी करना ठीक नहीं समझा। उसने कहा कि ‘थोड़ा अंधेरा है और मैं भी बूढ़ा हो गया हूं, ज़रा सब खिड़की-दरवाज़े खोल दो ताकि रोशनी आए और मैं ठीक से देख सकूं।’ सभी खिड़की-दरवाज़े खोल दिए गए। सोलोमन थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोले, ‘रानी, आपके बाएं हाथ में मौजूद फूल असली हैं।’

ईथोपिया की रानी हैरान हुई। उनके वज़ीर भी हैरान हुए। दरबारी भी पहचान नहीं पाए थे, सो उन्होंने सोलोमन से पूछा कि ‘आपने कैसे पहचाना? हम भी देख रहे थे, लेकिन रोशनी के बावजूद भी नहीं पहचान सके ।’

सोलोमन ने जवाब दिया, ‘मैंने नहीं पहचाना। मैं तो सिर्फ राह देखता रहा कि कोई मधुमक्खी भीतर आ जाए। और एक मधुमक्खी खिड़की से भीतर आ गई। अब मधुमक्खी को धोखा नहीं दिया जा सकता, चाहे कितने ही बड़े चित्रकारों ने फूल बनाए हों। मधुमक्खी जिस फूल पर बैठ गई, वही फूल असली हैं।’ सच है, जो असली है उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं, लेकिन असली से ज्यादा असली दिखने वाला ही नकली होगा, यह पहचानना हमको ही है।

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